नॉर्थ कोरिया से आया हैं रैनसमवेयर अटैक, भारतीय मूल के गूगल कर्मी नील मेहता ने दिए सबूत

भारतीय मूल के गूगल कर्मी नील मेहता ने एक कोड प्रकाशित किया हैं जो रैनसमवेयर अटैक के बारे में इशारा करता हैं|

गूगल में काम करने वाले एक भारतीय मूल के कर्मचारी नील मेहता ने ऐसे सबूत पेश किये हैं जो इशारा करते हैं कि रैनसमवेयर साइबर हमला उत्तर कोरियाई हैकरों ने किया हैं जिन्होंने दुनिया भर को अपना निशाना बनाया हैं| खबरों के मुताबिक, गूगल कर्मी नील मेहता ने एक कोड प्रकाशित किया हैं जिसको रूस की एक साइबर कंपनी ने अब तक का सबसे अहम सुराग बताया हैं|

शोधकर्ताओ के मुताबिक शुक्रवार को हुए रैनसमवेयर हमले में कुछ कोड इस्तेमाल किए गये, जिन्हें वाना क्राई सॉफ्टवेर कहा जाता हैं| यह उत्तर कोरिया के हैकरों का एक समूह हैं जिसने साल 2014 में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट को नुकसान पहुँचाने वाली हैकिंग के लिए इसी तरह के स्वरूप का इस्तेमाल किया था| पिछले साल बांग्लादेश सेन्ट्रल बैंक की हैकिंग में भी इसी प्रकार का इस्तेमाल किया गया था|

 नील मेहता की खोज के बाद सुरक्षा विशेषज्ञ 'वाना क्राई' हमले के तार लाजरुस समूह से जोड़ रहे हैं|मेहता की रिपोर्ट के बाद 'वानाक्राई' और अन्य सॉफ्टवेर के कोड के बीच समानताएं देखी गयी| शुक्रवार को दुनिया का सबसे बड़ा साइबर हमला देखा गया| एक कंप्यूटर मालवेयर के जरिए हमला करने वाले लोगो ने कंप्यूटर सिस्टम को लोक कर दिया और उसे खोलने के लिए फिरौती की मांग की| साइबर अटैक ने बिटकॉइन्स में 300 डॉलर की फिरौती की मांग की| 'वानाक्राई' साइबर अटैक का प्रभाव फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन, स्वीडन, भारत सहित कई देशों में देखा गया हैं|

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